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The New Chapter Of Success





Hey guy's, This is Sushil Falekar (Blogger)


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इंटरव्यू का सही नज़रिया (परिचय) साक्षात्कार (Interview) किसी भी परीक्षा का अंतिम एवं महत्त्वपूर्ण चरण होता है। इसमें न तो प्रारंभिक परीक्षा की तरह सही उत्तर के लिये विकल्प दिये जाते हैं और न ही मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्रों की तरह अपनी सुविधा से प्रश्नों के चयन की सुविधा होती है। साक्षात्कार में आपको हर प्रश्न का उत्तर देना अनिवार्य होता है, साथ ही आपके द्वारा किसी भी प्रश्न के लिये दिये गए उत्तर पर प्रति-प्रश्न (Counter-question) भी पूछे जाने की संभावना रहती है। आपके द्वारा दिये गए किसी भी गलत या हल्के उत्तर का ‘नैगेटिव मार्किंग’ जैसा ही प्रभाव पड़ने की संभावना रहती है। किसी भी उम्मीदवार के लिये साक्षात्कार के चरण की सबसे मुश्किल बात यह होती है कि प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा के विपरीत इसके लिये कोई निश्चित पाठ्यक्रम निर्धारित नहीं है। यही वजह है कि साक्षात्कार के दौरान पूछे जाने वाले प्रश्नों का दायरा बहुत व्यापक होता है। सिविल सेवा परीक्षा में इंटरव्यू के लिये कुल 275 अंक निर्धारित हैं। सामान्य रूप से देखें तो मुख्य परीक्षा के अंकों (1750 अंक) की तुलना में इस चरण के लिये निर्धारि...

कांग्रेस के गठन से पूर्व की राजनीतिक संस्थायें

कांग्रेस के गठन से पूर्व की राजनीतिक संस्थायें प्रस्तावना 19वीं शताब्दी के पूर्वाध में भारत में जिन राजनीतिक संस्थाओं की स्थापना हुयी उनका नेतृत्व मुख्यतः समृद्ध एवं प्रभावशाली वर्ग द्वारा किया गया। इन संस्थाओं का स्वरूप स्थानीय या क्षेत्रीय था। इन्होंने विभिन्न याचिकाओं एवं प्रार्थना-पत्रों के माध्यम से ब्रिटिश संसद के समक्ष निम्न मांगें रखीं- प्रशासनिक सुधारप्रशासन में भारतीयों की भागीदारी को बढ़ावा शिक्षा का प्रसार किंतु 19वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में देश में जिन राजनीतिक संस्थाओं का गठन हुआ उसका नेतृत्व मुख्यतः मध्य वर्ग के द्वारा किया गया। इस वर्ग के विभिन्न लोगों जैसे-वकीलों, डाक्टरों, पत्रकारों तथा शिक्षकों इत्यादि ने इन राजनीतिक संगठनों को शसक्त नेतृत्व प्रदान किया इन सभी ने सक्षम नेतृत्व प्रदान कर इन संस्थाओं की मांगों को परिपूर्णता एवं प्रासंगिकता प्रदान की। बंगाल में राजनीतिक संस्थाएं बंगाल में राजनीतिक आंदोलनों के सबसे पहले प्रवर्तक थे  राजा राममोहन राय । वे पाश्चात्य विचारों से प्रभावित व्यक्ति थे। उन्होंने ही सर्वप्रथम अंग्रेजों का ध्यान भार...

स्वतंत्रता संघर्ष की शुरुआत: The Beginning Of The Struggle For Independence

स्वतंत्रता संघर्ष की शुरुआत: The Beginning Of The Struggle For Independence प्रस्तावना  इस लेख के द्वारा हम भारत में आधुनिक राष्ट्रवाद के उदय के कारण ,कांग्रेस के गठन से पूर्व की राजनीतिक संस्थायें , कांग्रेस का गठन व उदारवादियों की शुरुआती सफलता के बारे में समझने की कोशिश करेंगे व विगत वर्षों के कुछ प्रश्नों को देखेंगे… उदारवादी चरण और प्रारंभिक कांग्रेस 1858-1905 ई. भारत में राष्ट्रवाद का उदय और विकास उन कारकों का परिणाम माना जाता है, जो भारत में उपनिवेशी शासन के कारण उत्पन्न हुए जैसे- नयी-नयी संस्थाओं की स्थापना, रोजगार के नये अवसरों का सृजन, संसाधनों का अधिकाधिक दोहन इत्यादि। किंतु विभिन्न परिस्थितियों के अध्योनपरांत यह ज्यादा तर्कसंगत होता है कि भारत में राष्ट्रवाद का उदय किसी एक कारण या परिस्थिति से उत्पन्न न होकर विभिन्न कारकों का सम्मिलित प्रतिफल था। संक्षिप्त रूप में देखा जाये तो भारत में राष्ट्रवाद के उदय एवं विकास के लिये निम्न कारक उत्तरदायी थे– विदेशी आधिपत्य का परिणाम।पाश्चात्य चिंतन तथा शिक्षा।फ्रांसीसी क्रांति के फलस्वरूप विश्व स्तर पर राष...